Moral stories in hindi | The Reflection of Your Actions | कर्मों का प्रतिफल

Moral stories in hindi | The Reflection of Your Actions | कर्मों का प्रतिफल

moral stories in hindi : एक आदमी और उसके बेटे जंगल के पहाड़ियों के बीच जा रहे थे। अचानक, बेटा पथ पर गिर गया और दर्द के साथ चिल्लाया, “आह!” अचानक, उसने पहाड़ से वही आवाज सुनी, “आह!” चौंकाकर, बेटा ने पुछा, “यह कौन है?” लेकिन आवाज ने वही जवाब दिया, “यह कौन है?” वह गुस्सा हो गया और फिर से चिल्लाया, “तुम बेवकूफ हो!” और फिर से आवाज वही थी, “तुम बेवकूफ हो!”

इससे परेशान होकर, बेटा ने अपने पिता से पूछा, “पिता, क्या हो रहा है? moral stories in hindi यह कौन है?” पिता ने उत्तर दिया, “बेटा, ध्यान दो।” पिता ने चिल्लाया, “तुम बहुत अच्छे हो।” और आवाज वही थी, “तुम बहुत अच्छे हो!” पिता फिर से चिल्लाए, “धन्यवाद।” और आवाज फिर से वही थी, “धन्यवाद!” बेटा बहुत हैरान हुआ, लेकिन उसे अब भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।

पिता ने समझाया, “बेटा, लोग इसे गुंथन कहते हैं, लेकिन यह जीवन की सच्चाई है। जीवन आपके कर्मों का परिचायक है। जो आप दूसरों को देंगे, वही आपको भी मिलेगा।”

सिख: हम जो दूसरों को देते हैं, वही जीवन हमें भी वैसा ही देता है। आपका जीवन एक यातायात या संयोजन नहीं है, बल्कि यह आपके कर्मों की प्रतिफलन है।

frequently asked questions (FAQs) related to the story in Hindi

कहानी में मोरल क्या है?

कहानी में आवाज का मतलब है कि जीवन आपके कर्मों का परिचायक होता है और आपके कर्मों का परिणाम आपको वैसा ही मिलता है, जैसे आप दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं।

पिता ने अपने बेटे को क्यों समझाया कि “ध्यान दो”?

पिता ने अपने बेटे को “ध्यान दो” कहकर समझाया कि उसको दूसरों के साथ व्यवहार में सकारात्मकता और संयम बनाए रखना चाहिए, चाहे दूसरे व्यक्ति का व्यवहार कुछ भी हो।

कहानी से हमें क्या सिखना चाहिए?

कहानी से हमें यह सिखना चाहिए कि हमारे कर्मों का परिणाम हमें भी वैसा ही मिलता है जैसा हम दूसरों के साथ व्यवहार करते हैं। moral stories in hindi हमें सकारात्मक और सहमत व्यवहार की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि हमारे जीवन में सुख-शांति हो सके।

स्टोरी में ‘गुंथन’ का क्या मतलब है?

‘गुंथन’ का मतलब होता है कर्मों का परिणाम या जीवन की सच्चाई। यह बताता है कि हमारे कर्मों का परिणाम हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है।

पिता ने अपने बेटे को क्या सिखाया?

पिता ने अपने बेटे को सिखाया कि जीवन हमारे कर्मों का परिचायक होता है, और जो हम दूसरों को देते हैं, वही हमें भी मिलता है। वह इस तत्व को समझाकर अपने बेटे को यह सिखाते हैं कि सच्चे और उच्च मानकों के साथ जीना बेहद महत्वपूर्ण है।

क्या इस कहानी का कोई उपयोगी संदेश है?

हाँ, इस कहानी का उपयोगी संदेश है कि हमें अच्छे कर्म करने और दूसरों के साथ उच्च मानकों के साथ व्यवहार करने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि यह हमारे जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

vinodswain.1993@gmail.com

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